Friday, 7 March 2014

महिला सशक्तिकरण में पंचायती राज की भूमिका

चूँकि भारतीय ग्रामीण महिलाएं जीवन के सभी क्षेत्रों में पिछड़ी रही हैं.इसीलिए उनके सशक्ति कारन के लिए किये जा रहे प्रयासों की समीक्षा कर अब तक की उपलब्धियों ,समस्याओं एंव कमियों का विश्लेषण करते हुए सार्थक एंव उपयोगी को अपनाना आवश्यक है.भारत में केंद्र एंव राज्य सरकारों के विभिन्न प्रशासनिक,वैधानिक,राजनीतिक एंव आर्थिक कार्यकर्मो  और योजनाओं के साथ भारतीय पंचायती राज व्यवस्था ने ग्रामीण महिला सशक्तिकरण में उल्लेखनीय योगदान किया है.73वें संविधान संशोधन के बाद गरमीं महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आया.इसलिए इस संशोधान से संबंधित प्रावधानों के को अम्ल में लाने व उनके प्रभावों का विश्लेषण  आवश्यक है.
क्या ग्रामीण महिलाओं का पंचायती राज से वास्तव में सशक्तिकरण हुआ है ?और अगर हाँ ,तो किस सीमा तक एंव किन अर्थों में?ये कुछ एसे प्रश्न हाँ जिनपर अब विचार करने की आवश्यकता है ,क्यूंकि पंचायती राज लागू हुए अब दो दशक हो गए हैं.इस लिए इस व्यवस्था का महिला सशक्ति कारन की दृष्टि से मूल्यांकन आवश्यक है.

इसमें कोई संदेह नहीं कि पंचायती राज महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया है लेकिन सशक्तिकरण की मात्रा क्षेत्र एंव परिस्थितियों के अनुसार भिन्न रही है.जिन पंचायती संस्थाओं में महिला प्रतिनिधि स्वंय मामलों को देखती है ,निर्णय प्रक्रिया में पूर्ण सक्रियता से भाग लेती हैं और समुदाय के विकास कार्कर्मों को बहरी एजेंसियों से सक्रियता से करवा पाती है तो कहा जा सकता है कि उन महिला प्रतिनिधियों का पूर्ण सशक्तिकारन हुआ है.दूसरी ओर अगर महिला प्रतिनिधि अपने घर से स्वतंत्र रूप से बाहर नहीं आतीं,घूँघट नहीं हटा पाती और अपने पति या संबंधी के कहने पर ही दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करती हैं,तो कहा जा सकता है कि उन महिला प्रतिनिधियों का सशक्तिकरण नहीं हुआ है.भारत में पंचायती राज संस्थाओं में अभी भी ये दोनों स्थितियाँ देखने को मिलती हैं.इस प्रकार सशक्तिकरण का परिणाम विभिन्न स्थानों एंव परिस्थितियों में भिन्न रहा है.वर्तमान में यह प्रवृत्ति देखने को मिल रही है कि पंचायती राज की महिला प्रतिनिधि अकेले सार्वजनिक क्षेत्रों में एंव अपने कार्यालयों में जाने लगी हैं,पुरुष प्रतिनिधियों के साथ कुर्सियों पर बैठने लगी हैं,सार्वजनिक चार्चाओं में हिस्सा लेने लगी हैं और ये सभी कदम उनके सशक्तिकरण को बढ़ाबा दे रहें हैं. निकट भविष्य में पंचायती राज में महिलाओं की सहभागिता से ग्रामीण क्षेत्रों में महिला साक्षरता एंव शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा.इसी प्रकार महिला शैक्षिक सशक्तिकरण होने से अगली पीढ़ी की महिला प्रतिनिधि बेहतर शिक्षित रहेगी और पंचायत के मामलों को सही से संभाल पाएगी.अतः यह खा जा सकता है कि धीरे धीरे ही सही पर महिला सशक्तिकारन हो रहा है. 

2 comments:

  1. हमारे साथ ऐसी जानकारीपूर्ण जानकारी साझा करने के लिए धन्यवाद इस तरह ब्लॉग को साझा करते रहें। मनीषा बापना मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण के लिए काम कर रही हैं। वह बच्चों, युवा लड़कियों और महिलाओं को अच्छे स्पर्श और बुरा स्पर्श के बारे में भी जानकारी प्रदान करती है। महिलाओं को लिए बेहतर स्थिति प्रदान करने के लिए डॉ. मनीषा बापना महिला सशक्तिकरण के लिए काम करती हैं।

    ReplyDelete